पीला सोना!!
Jitendra jain jila shivpuri समाचार
आज गमले की मिट्टी खोदी पकी हुई हल्दी की गांठें निकली ।
पिताजी ने बोई थी ।
टेरेस पर लगभग 17 प्रकार की सब्जियां लगा रखी थी ।
बाकी की म्याद पूरी हो गई ।
लेकिन हल्दी भीतर ही भीतर पनपती रही ।
पिताजी के परिणिब्बाण के लगभग पौने पाँच महीने बाद गमलों में नई सब्जियां लगाने गुड़ाई की तो थाली भर हल्दी निकली ।
अभी एक गमला और बाक़ी है उसे अगले सप्ताह खोदेंगे ।
पिताजी के हाथ की खेती की उपज का स्वाद ही बहुत विशिष्ट होता है ।
देखने में हल्दी की गांठे ऑक्टोपस जैसी दिख रही हैं । जैसे ज़मीन में छुपे बैठे ऑक्टोपस बाहर खींच लिए हों

