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रात की शिफ्ट: क्या महिला सुरक्षा पर राजनीति तैयार है? नेता चुप क्यों? Women's Safety At Night
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, नए श्रम कानूनों में महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन क्या हमारी राजनीति उन्हें सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी लेने को तैयार है? यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि सुरक्षा को केवल महिलाओं के साहस पर छोड़ देना इन सुधारों को विफल कर देगा।
सुरक्षा के उपाय केवल कागजी कार्रवाई नहीं होने चाहिए, बल्कि व्यावहारिक और लागू करने योग्य होने चाहिए।
अनिवार्य एस्कॉर्ट नीतियां, 'लास्ट-माइल' तक सुरक्षित परिवहन, वेरिफाइड ड्राइवर, जीपीएस से ट्रैक किए जाने वाले वाहन, रोशन पार्किंग क्षेत्र और निकास मार्ग सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
पैनिक-बटन सीधे पुलिस और आंतरिक प्रतिक्रिया टीमों से जुड़े होने चाहिए।
आपातकालीन एप महानगरों तक सीमित न रहें, उन्हें दूसरे राज्यों में भी काम करना चाहिए।
शिकायत अधिकारी 24 घंटे उपलब्ध हों और सुरक्षा समितियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
क्या हमारी **कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी बड़ी पार्टियां और उनके **नेता** इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हैं? यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा केवल नारों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में धरातल पर दिखाई दे।
हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने का अवसर मिले और वे सुरक्षित भी रहें।
क्या हमारी **राजनीति** और चुनावी मुद्दे इस पर ध्यान देंगे? यह देखना होगा कि आगामी **चुनाव** में महिला सुरक्षा का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण रहता है।
- नए श्रम कानून में महिलाओं को रात की शिफ्ट की अनुमति, सुरक्षा पर सवाल।
- अनिवार्य एस्कॉर्ट नीति, सुरक्षित परिवहन और पैनिक-बटन की अनिवार्यता।
- क्या कांग्रेस और बीजेपी जैसे नेता महिला सुरक्षा पर ठोस कदम उठाएंगे?
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Posted on 14 January 2026 | Visit चाचा का धमाका.com for more stories.