10 साल बाद एक बार फिर 1 वर्षीय बीएड कोर्स की वापसी को शिक्षा जगत में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है



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 Jitendra jain jila shivpuri  समाचार.                                 

10 साल बाद एक बार फिर 1 वर्षीय बीएड कोर्स की वापसी को शिक्षा जगत में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। 

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने लगभग एक दशक बाद इस पाठ्यक्रम को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। इस फैसले से उन हजारों युवाओं को राहत मिली है जो शिक्षक बनने का सपना देखते हैं, लेकिन दो साल के लंबे प्रशिक्षण और ज्यादा खर्च के कारण पीछे रह जाते थे। अब कम समय और कम फीस में शिक्षक बनने का रास्ता फिर से खुल गया है।बीते कुछ वर्षों से यह मांग उठ रही थी कि जिन छात्रों की शैक्षणिक नींव पहले से मजबूत है, उनके लिए एक वर्षीय प्रशिक्षण पर्याप्त हो सकता है। इसी जरूरत को समझते हुए यह फैसला लिया गया है, जिसे शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़ा यह फैसला क्यों अहम है

एक वर्षीय बीएड कोर्स की वापसी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। नई शिक्षा नीति में लचीलापन, समय की बचत और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया गया है। नीति का उद्देश्य यह है कि छात्र कम समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण हासिल कर सकें। ऐसे में एक वर्षीय बीएड कोर्स इस सोच के बिल्कुल अनुरूप बैठता है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मदद करता है।वर्ष 2014 से पहले देश में एक वर्षीय बीएड कोर्स ही चलता था, जिसे बाद में दो वर्षीय कर दिया गया। समय के साथ यह महसूस किया गया कि जिन छात्रों के पास पहले से चार वर्षीय स्नातक डिग्री या परास्नातक की योग्यता है, उनके लिए दो साल का प्रशिक्षण काल काफी लंबा हो जाता है। इससे समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च होता था। इन्हीं कारणों से एक बार फिर एक वर्षीय बीएड को शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

एक वर्षीय बीएड कोर्स का सामान्य ढांचा कैसा होगा

इस कोर्स की अवधि पूरे बारह महीने की होगी, जिसमें सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल रहेगा। अनुमान है कि इस कोर्स की फीस लगभग बीस हजार से तीस हजार रुपये के बीच रहेगी, जिससे यह अधिकतर छात्रों की पहुंच में रहेगा। कम समय में पूरा होने के कारण छात्र जल्दी शिक्षक बनने के योग्य हो सकेंगे और रोजगार की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।

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