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कामाख्या मंदिर: पुजारी का खौलते तेल से महाप्रसाद! क्या है आध्यात्मिक रहस्य? कामाख्या Temple: Tantric Spiritual Abode
गुवाहाटी, असम।
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर, जो देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है, अपनी तांत्रिक साधनाओं और चमत्कारी परंपराओं के लिए विश्व विख्यात है।
यहां की एक अनोखी परंपरा है, जिसमें मंदिर के पुजारी खौलते तेल में हाथ डालकर मां का भोग बनाते हैं और फिर भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित करते हैं।
यह प्रसाद 'महानिर्मल्य' कहलाता है और इसे वितरित करने की विधि विज्ञान और आस्था दोनों के लिए एक रहस्य बनी हुई है।
बताया जाता है कि इस विशेष प्रसाद को तैयार करने के लिए एक बड़े बर्तन में तेज गर्म तेल या घी का उपयोग किया जाता है।
तेल इतना गर्म होता है कि उसमें बुलबुले उठ रहे होते हैं, फिर भी पुजारी बिना किसी क्षति के खौलते तेल से महाप्रसाद निकालते हैं।
कामाख्या मंदिर में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो मां कामाख्या के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है।
हर साल लाखों श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य को देखने और प्रसाद प्राप्त करने के लिए यहां आते हैं।
मंदिर में होने वाली पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व है।
कामाख्या मंदिर, न केवल एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का भी एक अनमोल धरोहर है।
यह मंदिर धर्म और आस्था का एक जीवंत उदाहरण है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- कामाख्या मंदिर में पुजारी खौलते तेल से बनाते हैं महाप्रसाद।
- यह मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
- प्रसाद 'महानिर्मल्य' कहलाता है, वितरण की विधि रहस्यमय है।
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Posted on 24 January 2026 | Follow चाचा का धमाका.com for the latest updates.