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चुनाव पर सोशल मीडिया का प्रभाव: क्या वोटर बदल रहे हैं? | राजनीति Questioning Election Survey Reliability India
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद।
असम, बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में आगामी चुनावों को देखते हुए, एग्जिट पोल की चर्चा फिर से शुरू हो गई है, लेकिन उनकी भविष्यवाणियां पहले की तुलना में अधिक गलत साबित हो रही हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में सभी एग्जिट पोल गलत साबित हुए, और हरियाणा और बिहार के चुनावों में भी उनकी सटीकता में कमी देखी गई।
इसका मुख्य कारण यह है कि ये सर्वेक्षण अभी भी जाति, वर्ग, लिंग और क्षेत्र जैसे पारंपरिक कारकों पर निर्भर हैं।
यह सही है कि ये पारंपरिक कारक मतदाता की पसंद को प्रभावित करते हैं, लेकिन सोशल मीडिया और एआई-संचालित प्रचार अभियानों का व्यक्तिगत प्रभाव भी बढ़ रहा है।
आज के दौर में, **राजनीति** में सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इसका प्रभाव **चुनाव** परिणामों पर भी दिखाई दे रहा है।
विभिन्न **नेता** अपनी नीतियों और विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं।
ऐसे में, यह जानना जरूरी है कि सोशल मीडिया मतदाताओं को किस हद तक प्रभावित कर रहा है।
क्या **कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियां इस नए माध्यम का सही इस्तेमाल कर पा रही हैं? मतदाताओं पर सोशल मीडिया के इस बढ़ते प्रभाव का जायजा लेना बेहद जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
- चुनाव सर्वेक्षणों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
- सोशल मीडिया और एआई-संचालित प्रचार का प्रभाव बढ़ रहा है।
- मतदाताओं पर सोशल मीडिया के प्रभाव का जायजा लेना जरूरी है।
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Posted on 14 January 2026 | Check चाचा का धमाका.com for more coverage.