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सोने-चांदी की तेजी से आयुर्वेदिक दवाएं महंगी, निवेश पर असर? उद्योग Ayurvedic Medicine Prices Surge
दिल्ली: चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में हुई भारी वृद्धि का असर अब आयुर्वेदिक दवाओं पर भी दिखने लगा है।
कमजोरी दूर करने वाली शक्तिवर्धक दवा स्वर्ण भस्म की कीमत में एक साल में लगभग 7 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह 19 हजार से बढ़कर 26 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
डायबिटीज की दवा वसंत कुसुमाकर भी 1100 रुपये महंगी हो गई है, और सर्दियों में उपयोग होने वाला च्यवनप्राश भी अब महंगा हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में 75% और चांदी की कीमतों में 167% की वृद्धि के कारण इन दवाओं की कीमतें बढ़ी हैं।
आयुर्वेदिक दवाओं में सोने और चांदी का उपयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि चांदी में बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता होती है, इसलिए इसका उपयोग गंभीर इंफेक्शन और जलने के घावों के इलाज में किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, कुछ मेडिकल उपकरणों में भी इसका प्रयोग होता है।
इन बदलावों का सीधा असर वित्त और उद्योग पर पड़ रहा है, क्योंकि निवेशकों को अब इन महंगी दवाओं के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा।
शेयर मार्केट में भी इन कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि कीमतों में वृद्धि से बिक्री प्रभावित हो सकती है।
इस परिस्थिति में, निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों को ही अपनी निवेश योजनाओं और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करती है या नहीं, ताकि आम आदमी पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ को कम किया जा सके।
- स्वर्ण भस्म की कीमत में 7 हजार रुपये की वृद्धि, डायबिटीज की दवा भी महंगी।
- सोने की कीमतों में 75% और चांदी की कीमतों में 167% की वृद्धि।
- चांदी का उपयोग इंफेक्शन और जलने के घावों के इलाज में होता है।
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Posted on 16 January 2026 | Visit चाचा का धमाका.com for more stories.