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मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर धर्म और आध्यात्म का संगम: जानिए पूजा-विधि और महत्व Ujjain Purnima Religious Significance
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन में गुरुवार, 4 दिसंबर को अगहन (मार्गशीर्ष) मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है, जो धर्म और आध्यात्म की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस शुभ अवसर पर भगवान दत्तात्रेय का प्रकट उत्सव भी धूमधाम से मनाया जा रहा है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु व दत्तात्रेय की विशेष पूजा करने की प्राचीन परंपरा है।
ऐसी मान्यता है कि इस पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है, जितना किसी महायज्ञ को संपन्न करने से मिलता है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, मार्गशीर्ष मास में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा का विधान है, क्योंकि द्वापर युग में स्वयं श्रीकृष्ण ने इस मास को अपना स्वरूप बताया था, जिसका उल्लेख महाभारत और श्रीमद्भगवद् गीता में भी मिलता है।
इस पावन दिन पर किसी तीर्थ स्थल या पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दान करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है।
यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य संचय का अवसर प्रदान करता है।
मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गीता जयंती मनाई जाती है, इसलिए पूर्णिमा के अवसर पर गीता का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
भगवान दत्तात्रेय, जिन्हें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का सम्मिलित स्वरूप माना जाता है, का प्रकट उत्सव भी इसी दिन पड़ता है।
उनकी पूजा से त्रिदेवों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है।
यह दिन भक्तों को धर्म के मार्ग पर चलने और सद्कर्म करने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन में शांति और समृद्धि आती है।
अनेक मंदिरों में इस दिन विशेष अनुष्ठान और दीपदान भी आयोजित किए जाते हैं, जहाँ श्रद्धालु अपने आराध्य देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए एकत्रित होते हैं।
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर पवित्र स्नान व दान से मिलता है यज्ञ जितना पुण्य।
- भगवान दत्तात्रेय का प्रकट उत्सव; त्रिदेवों की पूजा का महत्व।
- इस दिन गीता पाठ और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा भी करें।
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Posted on 02 December 2025 | Follow चाचा का धमाका.com for the latest updates.