पौष अमावस्या पर करें विशेष पूजा: कैसे पाएं पितरों का आशीर्वाद और मन की शांति? Paush Amavasya Ujjain Celebration

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पौष अमावस्या पर करें विशेष पूजा: कैसे पाएं पितरों का आशीर्वाद और मन की शांति? Paush Amavasya Ujjain Celebration

चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन में आज यानी शुक्रवार, 19 दिसंबर को पौष मास की अमावस्या मनाई जा रही है।

यह महत्वपूर्ण तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिसका समापन शनिवार सुबह लगभग 7 बजे होगा।

हालांकि, धर्म-कर्म से जुड़े सभी प्रमुख अनुष्ठान आज ही संपन्न किए जाएंगे, क्योंकि पूरे दिन अमावस्या तिथि का संयोग बना हुआ है।

यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित होता है, और मान्यता है कि इस पावन अवसर पर किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य से कुटुंब के दिवंगत सदस्यों यानी पितर देवताओं को पूर्ण तृप्ति मिलती है।

जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष की समस्या है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा-पाठ और धर्मिक अनुष्ठान करने की सलाह दी जाती है ताकि दोषों का निवारण हो सके और घर में सुख-शांति बनी रहे।

उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि पौष अमावस्या पर पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा और शिप्रा में स्नान करने से अनजाने में हुए पाप कर्मों का क्षय होता है।

यदि किसी कारणवश इन तीर्थ स्थलों पर जाकर स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

स्नान करते समय सभी पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।

इसके साथ ही, इस दिन सूर्य देव और चंद्र देव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिससे मन शांत होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

इस आध्यात्मिक अवसर पर दान का भी बड़ा पुण्य होता है, विशेषकर अन्न और वस्त्र का दान शुभ माना जाता है।

यह दिन आत्मिक शुद्धि और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक अनुपम अवसर प्रदान करता है।

पौष अमावस्या न केवल पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रह शांति और मानसिक स्थिरता के लिए भी एक शक्तिशाली दिन है।

इस दिन किए गए सभी धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता लाते हैं और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करते हैं।

मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

यह भारतीय धर्म और संस्कृति का एक अभिन्न अंग है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।

  • पौष अमावस्या पर पितरों को तृप्ति देने के लिए विशेष पूजा-पाठ और तर्पण करें।
  • पवित्र नदियों में स्नान या गंगाजल मिलाकर स्नान से पापों का नाश होता है।
  • सूर्य-चंद्र की पूजा से मन शांत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

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Posted on 19 December 2025 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.

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