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खुशी की राजनीति: देने में है आनंद, एन. रघुरामन का विश्लेषण राजनीति Parenthood: Giving Generates True Happiness
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, जीवन में सच्ची खुशी तब मिलती है जब कोई पाने वाला देने वाला बन जाता है, खासकर पैरेंटहुड में।
एन. रघुरामन अपने कॉलम में इस बात पर जोर देते हैं कि जब बच्चे अपनी चीजों को दूसरों के साथ साझा करते हैं, तो उन्हें सशक्तिकरण का अनुभव होता है।
यह छोटा सा कदम लोगों के बीच सकारात्मक भावनाएं जगाता है और आनंद को सामूहिक जुड़ाव में बदल देता है।
लेखक ने एक स्कूल के एनुअल फंक्शन में ‘फेस्टिवल्स ऑफ इंडिया’ थीम सॉन्ग के दौरान इस गहरे आनंद को महसूस किया, जहाँ उन्होंने देखा कि कैसे भारत में मकर संक्रांति से शुरू होकर लगभग हर महीने त्योहार आते हैं।
स्टेज पर सांता क्लॉज का आना इस भावना को और भी मजबूत करता है।
इस संदर्भ में, **राजनीति** से तात्पर्य सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि दूसरों को खुशी देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता से भी है।
**कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसे **नेता** भी इस सिद्धांत को अपनाकर समाज में बेहतर योगदान दे सकते हैं।
आगामी **चुनाव** में यह भावना मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है।
रघुरामन का विश्लेषण हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या **राजनीति** में भी इसी तरह देने की भावना को महत्व दिया जाना चाहिए।
- देने वाला बनने पर खुशी दोगुनी हो जाती है, पैरेंटहुड में यह अनुभव आम है।
- बच्चों में साझा करने की भावना सशक्तिकरण का एहसास कराती है।
- साझा करने की भावना आनंद को सामूहिक जुड़ाव में बदल देती है।
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Posted on 30 December 2025 | Stay updated with चाचा का धमाका.com for more news.