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शीतल देवी ने खेल इतिहास में रचा नया अध्याय: एबल-बॉडीड टीम में मिली जगह Sheetal Devi Para Archer History
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की उभरती हुई पैरा-आर्चर शीतल देवी ने एक बार फिर भारतीय खेल जगत में इतिहास रच दिया है।
जन्म से बिना हाथों के बावजूद, उन्होंने वह असाधारण उपलब्धि हासिल की है जो अब तक किसी पैरा एथलीट ने नहीं की थी।
शीतल को सऊदी अरब के जेद्दाह में होने वाले एशिया कप स्टेज-3 के लिए भारतीय एबल-बॉडीड जूनियर टीम में शामिल किया गया है।
यह पहली बार है जब किसी पैरा खिलाड़ी को सामान्य खिलाड़ियों की टीम में जगह मिली है, जो भारतीय तीरंदाजी और **खेल** के लिए एक मील का पत्थर है।
उनकी यह उपलब्धि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और अटूट खेल भावना का प्रतीक है।
शीतल ने इस चयन के बाद अपनी भावनाओं को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि उनका एक छोटा-सा सपना था कि वे सामान्य खिलाड़ियों के साथ **खेल** सकें।
कई असफलताओं के बावजूद, उन्होंने हर गलती से सीखा और अपने सपने के एक कदम और करीब पहुंच गईं।
शीतल तुर्की की पैरा चैंपियन ओज़नुर क्योर गिर्डी से प्रेरित हैं, जो खुद भी सामान्य प्रतियोगिताओं में भाग लेती हैं।
शीतल ने पहले भी देश का नाम रोशन किया है, खासकर 2024 पेरिस पैरालंपिक में मिक्स्ड टीम कंपाउंड इवेंट में कांस्य पदक जीतकर, जिसने **एथलेटिक्स** के क्षेत्र में उनकी प्रतिभा को उजागर किया।
उनकी यात्रा प्रेरणादायक रही है, जिसमें उन्होंने कई संघर्षों का सामना किया।
हरियाणा के सोनीपत में आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें यह ऐतिहासिक स्थान दिलाया है।
यह सिर्फ शीतल की व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे पैरा-स्पोर्ट्स समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो यह दर्शाता है कि इच्छाशक्ति और समर्पण से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।
यह चयन भारतीय **खेल** संघों को समावेशिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करेगा।
- शीतल देवी एबल-बॉडीड भारतीय तीरंदाजी टीम में शामिल होने वाली पहली पैरा आर्चर बनीं।
- जन्म से बिना हाथों के बावजूद उन्होंने खेल जगत में यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की।
- उन्होंने 2024 पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था।
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Posted on 09 November 2025 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.