देवउठनी एकादशी से विवाह उत्सव का शुभारंभ: जानें आध्यात्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त Devuthani Ekadashi Auspicious Beginnings

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देवउठनी एकादशी से विवाह उत्सव का शुभारंभ: जानें आध्यात्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त Devuthani Ekadashi Auspicious Beginnings

चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, आज, 1 नवंबर को देशभर में देवउठनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है।

यह दिन भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जागृति का प्रतीक है और इसी के साथ विवाह जैसे शुभ कार्यों का सिलसिला भी आरंभ हो जाता है।

ज्योतिषियों के अनुसार, यह एक "अबूझ मुहूर्त" होता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना किसी विशेष पंचांग गणना के भी विवाह संपन्न किए जा सकते हैं।

इस पावन अवसर पर तुलसी और भगवान शालिग्राम के विवाह की पौराणिक परंपरा निभाई जाती है, जो गृहस्थ जीवन के लिए मंगलकारी मानी जाती है।

यह पर्व न केवल विवाह बल्कि अन्य मांगलिक कार्यों और गृह प्रवेश के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है, जिसमें श्रद्धालुगण पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।

इस वर्ष धर्म के इस विशेष दिन से शादियों का सीजन गति पकड़ेगा, लेकिन मुहूर्त सीमित हैं।

2 नवंबर से विवाह शुरू होंगे और सीजन का अंतिम मुहूर्त 6 दिसंबर को रहेगा।

इस नवंबर में कुल 14 और दिसंबर में केवल 3 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण दिसंबर में मुहुर्तों की संख्या में कमी आई है।

सामान्यतः 15 दिसंबर तक शादियों के मुहूर्त उपलब्ध रहते हैं, जिसके बाद धनुर्मास आरंभ हो जाता है, और इस अवधि में विवाह वर्जित माने जाते हैं।

आगामी वर्ष 2026 में विवाह के लिए कुल 59 शुभ दिन उपलब्ध होंगे, जिसमें जनवरी में कोई मुहूर्त नहीं होगा, और शादियां फरवरी से शुरू होंगी।

देवता के जागृत होने का यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां वे मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ करते हैं।

शुक्र और बृहस्पति जैसे ग्रहों का अस्त होना विवाह मुहुर्तों को प्रभावित करता है।

इन ग्रहों के अस्त होने पर गुरुत्व बल कमजोर माना जाता है, जिससे शुभ कार्यों की ऊर्जा प्रभावित होती है।

यही कारण है कि जनवरी 2026 में भी शुक्र के अस्त होने से कोई विवाह मुहूर्त नहीं रहेगा।

इसके बाद 15 जनवरी को धनुर्मास समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त फिर से उपलब्ध होंगे।

यह पर्व भारतीय धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो तीर्थ यात्राओं और अनुष्ठानों के लिए भी प्रेरित करता है।

देश भर में इस अवसर पर विविध धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जो सामाजिक सद्भाव और पारंपरिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।

  • देवउठनी एकादशी से विवाह सीजन का शुभारंभ; इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है।
  • इस साल नवंबर-दिसंबर में केवल 17 विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं।
  • 2026 में कुल 59 विवाह मुहूर्त होंगे, जनवरी में शुक्र अस्त के कारण कोई मुहूर्त नहीं।

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Posted on 01 November 2025 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.

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