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बिहार चुनाव: बीजेपी की रणनीति ने कैसे बदली सियासी बाजी? विपक्ष क्या सीखेगा? Bihar Elections Surprise Bjp
बिहार में, चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया चुनावों के परिणाम ने कई सियासी पंडितों की सोच से कहीं अधिक सीटें लाकर सबको चौंका दिया है।
यह सवाल उठाना लाजिमी है कि आखिर बीजेपी ने यह सफलता कैसे हासिल की, जबकि शुरुआत में उसे कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
मैथिली ठाकुर के स्थानीय भाजपा में विरोध को थामना हो या पंकज सिंह को पार्टी के पक्ष में लाना, साथ ही सुशासन का संदेश देने के लिए चुनाव से ठीक पहले बाहुबली नेता अनंत सिंह की गिरफ्तारी जैसे कूटनीतिक कदम, इन सबने एक अहम भूमिका निभाई।
यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हर स्तर के चुनाव में जितनी मेहनत और लगन से काम करती है, उतनी अन्य कोई राजनीतिक पार्टी नहीं कर पाती।
चाहे गुजरात जैसा तुलनात्मक रूप से आसान राज्य हो या बिहार जैसा कठिन चुनावी रण, बीजेपी की चुनावी तैयारी और कार्यकर्ताओं का उत्साह एक समान बना रहता है।
संघ के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जो सघन प्रचार अभियान चलाते हैं, वह किसी और दल के लिए संभव नहीं दिख पाता।
यह बीजेपी की जमीनी स्तर की राजनीति और कार्यकर्ता आधारित संगठन की शक्ति का प्रमाण है।
एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण बीजेपी के पास कार्यकर्ताओं की एक विशाल फौज है, जिनमें उत्साह और ऊर्जा भरपूर है।
इसके विपरीत, विपक्षी दलों में शायद इन दोनों चीजों की कमी महसूस होती है, जिससे वे बीजेपी की बराबरी करने में अक्षम दिखाई देते हैं।
इस गहन परिश्रम और व्यवस्थित संगठन के कारण ही बीजेपी अक्सर अपनी अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर पाती है, और यह सीख अन्य दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है कि कैसे चुनाव में सफलता के लिए निरंतर प्रयास और समर्पित कार्यकर्ता ही सबसे बड़े नेता साबित होते हैं।
- बीजेपी ने बिहार चुनाव में उम्मीद से अधिक सीटें हासिल कीं।
- पार्टी कार्यकर्ताओं और संघ स्वयंसेवकों की जमीनी मेहनत अहम रही।
- कुशल कूटनीति और मजबूत संगठन ने बीजेपी की जीत में योगदान दिया।
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Posted on 21 November 2025 | Stay updated with चाचा का धमाका.com for more news.