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मतदाता सूची में गड़बड़ी: क्या एसआईआर-2 की घोषणा से चुनावी राजनीति गरमाई? Prashant Kishor Dual Voter Registration
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव की गहमागहमी के बीच चुनावी राजनीति में प्रशांत किशोर के दो राज्यों में मतदाता के तौर पर पंजीकृत होने की खबर ने हलचल मचा दी थी।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण-2 (एसआईआर-2) प्रक्रिया को सुर्खियों में ला दिया है।
चुनाव आयोग ने अब इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को और राज्यों में विस्तारित करने की घोषणा की है, जिसका सीधा असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।
यह प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को शुद्ध करना है, कई राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
बिहार में, इस प्रक्रिया के तहत लगभग 68 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिनमें से 7 लाख ऐसे थे जिनके नाम एक से अधिक मतदाता सूची में दर्ज थे।
अब, निर्वाचन आयोग द्वारा नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर-2 की घोषणा ने इस कवायद को फिर से चर्चा का केंद्र बना दिया है।
इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है।
केरल विधानसभा में इस प्रक्रिया के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
पश्चिम बंगाल में, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में विधानसभा और नगरीय निकाय के चुनावों से ठीक पहले इस प्रक्रिया को कराने के समय पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने अपने पार्टी के समर्थकों को मताधिकार से वंचित करने की आशंका व्यक्त की है।
इन तीनों ही राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं और वहां 2026 में महत्वपूर्ण चुनाव प्रस्तावित हैं, जिससे यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।
विपक्षी नेता इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
यह पूरा मामला भारतीय चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता और राजनीतिक दलों की आशंकाओं के बीच एक संतुलन खोजने की चुनौती को उजागर करता है।
भविष्य के चुनाव में मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होगी।
- चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में SIR-2 प्रक्रिया की घोषणा की, जो नवंबर 2025 से शुरू होगी।
- बिहार में SIR-2 के तहत 68 लाख नाम हटाए गए, जिनमें 7 लाख दोहरी प्रविष्टि वाले थे।
- केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इस प्रक्रिया के समय और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
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Posted on 02 November 2025 | Stay updated with चाचा का धमाका.com for more news.