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अमेरिकी वीज़ा नियम: अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भर्ती नीति में बड़ा बदलाव क्यों? Trump Tightens H1b Visa Rules
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा एच1बी वीज़ा नियमों में की गई सख्ती के बाद, अमेरिका में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भर्ती रणनीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है।
भारतीय इंजीनियरिंग और डिजिटल सेवाओं की दिग्गज कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज ने घोषणा की है कि वह अब संयुक्त राज्य अमेरिका में अधिक स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे विदेशी प्रतिभाओं पर उसकी निर्भरता कम हो सकेगी।
टाटा टेक्नोलॉजीज के सीईओ वारेन हैरिस ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वीज़ा और संबंधित कानूनों में बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया देते हुए, कंपनी अमेरिका में अधिक स्थानीय नागरिकों की भर्ती करेगी।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख कंपनियां भी इसी तरह के परिवर्तनों को अपना रही हैं।
उदाहरण के लिए, अमेरिका की सबसे बड़ी निजी नियोक्ता कंपनी वॉलमार्ट ने हाल ही में ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए नए 100,000 डॉलर के आवेदन शुल्क का हवाला देते हुए एच-1बी वीज़ा की आवश्यकता वाले उम्मीदवारों के लिए नौकरी की पेशकश रोक दी है।
यह वाशिंगटन द्वारा एच1बी वीज़ा शुल्क में वृद्धि और अप्रवासन नीतियों को कड़ा करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
ये बदलाव केवल टाटा टेक्नोलॉजीज या वॉलमार्ट तक ही सीमित नहीं हैं; बल्कि इनका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक प्रतिभा प्रवाह पर भी पड़ रहा है।
अमेरिकी सरकार की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने भारतीय आईटी और इंजीनियरिंग सेवा प्रदाताओं के लिए विदेश में परिचालन की लागत और जटिलता को बढ़ा दिया है।
कंपनियों को अब अपनी वैश्विक कार्यबल रणनीति को फिर से परिभाषित करना पड़ रहा है, जिससे भविष्य में एच-1बी वीज़ा पर निर्भरता कम हो और स्थानीय श्रम बाजार पर अधिक जोर दिया जा सके।
- ट्रंप प्रशासन की H-1B वीज़ा सख्ती से अमेरिकी कंपनियों की रणनीति बदली।
- टाटा टेक्नोलॉजीज अब अमेरिका में ज़्यादा स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती करेगी।
- वॉलमार्ट ने $100k वीज़ा शुल्क के कारण H-1B नौकरी पेशकश रोकी।
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Posted on 25 October 2025 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.