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टाटा ट्रस्ट: श्रीनिवासन की आजीवन नियुक्ति, क्या थमेगा विवाद? Tata Trust Reappoints Venu Srinivasan
मुंबई से चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त किया है, जो समूह के भीतर चल रहे विवादों के बीच एक बड़ी खबर है।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टियों द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब श्रीनिवासन का कार्यकाल 23 अक्टूबर को समाप्त होने वाला था।
यह नियुक्ति टाटा समूह से जुड़े संगठनों में चल रही आंतरिक खींचतान के माहौल में सामने आई है, जहाँ समूह दो हिस्सों में बंटा हुआ दिख रहा है – एक पक्ष नोएल टाटा का अनुसरण कर रहा है, जबकि दूसरा पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के करीबियों के साथ है।
इस आजीवन नियुक्ति का अर्थ है कि श्रीनिवासन का कार्यकाल अब कभी समाप्त नहीं होगा, जो **उद्योग** जगत में स्थिरता और दीर्घकालिक योजना का संकेत देता है।
यह फैसला जनवरी 2025 में चेयरमैन नोएल टाटा की आजीवन नियुक्ति के बाद आया है।
SDTT और SRTT की टाटा संस में कुल 52% हिस्सेदारी है, जो उनके फैसलों को **शेयर** बाजार और पूरे **मार्केट** पर गहरा असर डालने की क्षमता प्रदान करती है।
वेणु श्रीनिवासन की दोबारा नियुक्ति 17 अक्टूबर 2024 को ट्रस्ट्स द्वारा सर्वसम्मति से पारित एक प्रस्ताव के बाद की गई है।
इस प्रस्ताव में कहा गया था कि 'किसी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होने पर उस ट्रस्टी को संबंधित ट्रस्ट की ओर से आजीवन के लिए दोबारा नियुक्त किया जाएगा।
' इसी नियम के तहत दूसरे ट्रस्टी मेहली मिस्त्री को भी दोबारा नियुक्त किया गया है।
यह कदम टाटा के विशाल **उद्योग** साम्राज्य में नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करने और भविष्य की **निवेश** तथा **वित्त** रणनीतियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देखा जा रहा है, जिससे समूह के भीतर चल रहे गतिरोध पर विराम लगने की उम्मीद है।
- वेणु श्रीनिवासन टाटा ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी नियुक्त किए गए हैं।
- यह फैसला टाटा समूह के आंतरिक विवादों के बीच आया है।
- ट्रस्ट की टाटा संस में 52% हिस्सेदारी है, मार्केट पर असर।
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Posted on 22 October 2025 | Stay updated with चाचा का धमाका.com for more news.