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सिक्किम का तिहार उत्सव: पशु-पूजा का आध्यात्मिक महत्व और यम-यमुना संबंध Sikkim Tihar Love Nature Harmony
सिक्किम में, चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, जब पूरा देश दिवाली के रंगों में डूबा होता है, तब एक अनोखा तिहार उत्सव प्रेम, सद्भाव और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
देशभर में जहां दीपावली को अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है, वहीं सिक्किम में यह त्योहार तिहार या यमपंचक के नाम से पांच दिनों तक बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
मुख्य रूप से नेपाली समुदाय, जिसे यहां गोरखा कहा जाता है, द्वारा मनाया जाने वाला यह पर्व मृत्यु के देवता यम और उनकी बहन यमुना के आध्यात्मिक संबंधों पर केंद्रित है।
यह पर्व इंसानों, पशुओं और देवताओं के बीच के गहरे संबंधों को सम्मान और आभार के साथ याद करने का अवसर प्रदान करता है।
इस धार्मिक पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी यमुना ने अपने भाई यम को घर बुलाने के लिए कौवे, कुत्ते और गाय को दूत के रूप में भेजा था।
इसी मान्यता के आधार पर तिहार में इन पशुओं की विशेष पूजा की जाती है, जो प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा तरीका है।
इस दौरान बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए सात रंगों का तिलक भी लगाती हैं।
यह उत्सव सिक्किम के अलावा दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
यह पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि सामाजिक सद्भाव और प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान की भावना का भी प्रतीक है।
- सिक्किम में 5 दिवसीय तिहार उत्सव का विशेष महत्व।
- कौवे, कुत्ते, गाय-बैल की पूजा: यम और यमुना से जुड़ी पौराणिक मान्यता।
- प्रेम, सद्भाव व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का यह धार्मिक पर्व।
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Posted on 15 October 2025 | Check चाचा का धमाका.com for more coverage.