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डिजिटल इंडिया में स्वदेशी को बढ़ावा: सरकारी नीतियों का क्या है राजनीतिक महत्व? India Indigenous Tech Promotion
चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय डिजिटल परिदृश्य में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखी जा रही है।
आईआईटी से शिक्षित और अमेरिका का अनुभव रखने वाले श्रीधर वेम्बू ने डिजिटल इंडिया में स्वदेशी का बिगुल फूंका है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी सरकारी कार्यालयों में जोहो के ऑफिस सुइट के उपयोग का निर्देश दिया है, जिसमें वर्ड प्रोसेसिंग, नोट टेकिंग और वेब कांफ्रेंसिंग जैसी आवश्यक सुविधाएँ शामिल हैं।
यह कदम माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी विदेशी कंपनियों पर भारत की निर्भरता को प्रतीकात्मक रूप से कम करने की दिशा में एक बड़ा **राजनीतिक** संदेश देता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) सहित कई वरिष्ठ **नेता** और 12 लाख से अधिक **सरकारी** अधिकारियों ने जोहो में अपने ईमेल खाते शुरू कर दिए हैं।
इसके साथ ही, वॉट्सएप के विकल्प के तौर पर विकसित किए गए जोहो के अरट्टई स्वदेशी मैसेजिंग ऐप की भी खूब सराहना हो रही है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
हालांकि, आत्मनिर्भर भारत की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने के लिए केवल तकनीकी नवाचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी और नीतिगत सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है।
इस संदर्भ में तीन प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं।
पहला, पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
इस कानून के तहत, **सरकारी** ईमेल को विदेशी सर्वर में संग्रहित करना एक गंभीर अपराध माना गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र **सरकार** ने 2014 में राष्ट्रीय ईमेल नीति बनाई थी, जिसके अनुसार केंद्र के 45 लाख कर्मचारियों को **सरकारी** कामकाज के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) का उपयोग करना अनिवार्य है।
दूसरा, डेटा सेंटरों, क्लाउड सेवाओं और ईमेल सेवाओं को रणनीतिक उद्योगों का दर्जा देना, ठीक उसी तरह जैसे रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष को दिया जाता है।
इसके लिए एक मजबूत डेटा लोकलाइजेशन कानून की आवश्यकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है।
तीसरा, राष्ट्रीय साइबर नीति को मजबूत करना, जिसमें सभी डिजिटल लेनदेन के लिए 'जीरो ट्रस्ट' दृष्टिकोण अपनाया जाए।
AIIMS जैसे महत्वपूर्ण **सरकारी** संस्थानों पर हुए हालिया साइबर हमलों ने हमारी डिजिटल कमजोरियों को उजागर किया है, और यह स्पष्ट करता है कि साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का एक गैर-परक्राम्य हिस्सा है, जिस पर सभी **नेता** सहमत हैं।
इन उपायों को लागू करना भारत की डिजिटल संप्रभुता और स्वदेशीकरण की **राजनीति** के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- जोहो ऑफिस सुइट का उपयोग: **सरकारी** दफ्तरों में बढ़ा **स्वदेशी** तकनीकी का प्रयोग।
- पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट का पालन: विदेशी सर्वर पर डेटा रखना अब गंभीर अपराध।
- डेटा केंद्रों को रणनीतिक उद्योग का दर्जा: साइबर सुरक्षा और **राष्ट्रीय** हित।
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Posted on 24 October 2025 | Keep reading चाचा का धमाका.com for news updates.