क्या अमेरिकी नियंत्रण में था पाक का परमाणु जखीरा? पूर्व CIA एजेंट का बड़ा दावा Us Never Controlled Pakistan Nukes

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क्या अमेरिकी नियंत्रण में था पाक का परमाणु जखीरा? पूर्व CIA एजेंट का बड़ा दावा Us Never Controlled Pakistan Nukes

चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख जॉन किरियाको ने एक महत्वपूर्ण दावा किया है, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार पर कभी अमेरिका का सीधा नियंत्रण था।

यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस छेड़ सकता है, खासकर तब जब विश्व में परमाणु सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय है।

किरियाको, जिन्होंने सीआईए के साथ 15 साल तक काम किया है, ने बताया कि अमेरिका ने पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का सहयोग खरीदने के लिए करोड़ों डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान की थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा इस अप्रत्यक्ष नियंत्रण की कीमत भी हो सकता है।

यह मामला विदेश नीति और देशों के बीच शक्ति संतुलन के जटिल ताने-बाने को उजागर करता है।

किरियाको ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब वे 2002 में पाकिस्तान में तैनात थे, तो उन्हें अनौपचारिक रूप से यह जानकारी दी गई थी कि पेंटागन पाकिस्तानी परमाणु शस्त्रागार को नियंत्रित करता है।

मुशर्रफ़ को यह डर था कि कहीं कोई बड़ी गड़बड़ न हो जाए, इसलिए उन्होंने अमेरिका को यह पहुँच दी थी।

हालांकि, हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने इस बात से इनकार किया है, जो इस दावे को और अधिक विवादास्पद बनाता है।

किरियाको ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पाकिस्तानी जनरलों का पूर्ण नियंत्रण होता, तो उन्हें राजनीतिक अस्थिरता के समय इसकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता होती।

ऐसे दावे ग्लोबल सुरक्षा परिदृश्य पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं और यह समझने में मदद करते हैं कि कैसे बड़े राष्ट्र छोटे राष्ट्रों की संवेदनशील संपत्तियों को प्रभावित कर सकते हैं।

अपने साक्षात्कार में, किरियाको ने अमेरिका की विदेश नीति के एक पहलू पर भी प्रकाश डाला, जिसमें तानाशाहों के साथ काम करना पसंद किया जाता है।

उन्होंने कहा कि मुशर्रफ़ ने अमेरिका को अपनी मनमर्ज़ी करने दी, जिससे अमेरिका को पाकिस्तान में अपने रणनीतिक हितों को साधने में मदद मिली।

यह प्रकरण न केवल पाकिस्तान के परमाणु इतिहास से जुड़ा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विश्वास और संप्रभुता के मुद्दों को भी सामने लाता है।

इन दावों का मूल्यांकन विश्व समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके और परमाणु अप्रसार समझौतों को मजबूत किया जा सके।

  • पूर्व CIA एजेंट जॉन किरियाको का दावा: पाक के परमाणु जखीरे पर अमेरिका का नियंत्रण था।
  • मुशर्रफ़ ने अमेरिकी मदद के बदले दी थी परमाणु शस्त्रागार तक पहुँच।
  • अंतरराष्ट्रीय संबंधों और परमाणु सुरक्षा पर इस खुलासे के बड़े निहितार्थ।

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Posted on 25 October 2025 | Follow चाचा का धमाका.com for the latest updates.

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