AI डीपफेक पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: क्या भारत को अब सख्त नियामक की आवश्यकता? Supreme Court Deepfake Pil

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AI डीपफेक पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: क्या भारत को अब सख्त नियामक की आवश्यकता? Supreme Court Deepfake Pil

दिल्ली से, चाचा का धमाका की रिपोर्ट के अनुसार: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों, विशेषकर डीपफेक के अनियंत्रित प्रसार पर गंभीर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

इस याचिका में केंद्र सरकार से एक व्यापक नियामक और लाइसेंसिंग ढांचा तैयार करने की तत्काल मांग की गई है ताकि व्यक्तियों की निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सके।

यह मुद्दा अब पूरे भारत के लिए एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता आरती साह ने अपनी दलील में इस बात पर जोर दिया है कि एआई सिस्टम, जो वास्तविक लोगों की आवाज, तस्वीर या वीडियो की हूबहू नकल कर सकते हैं, उनके लिए तुरंत कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि डीपफेक का बेकाबू प्रसार न केवल व्यक्तिगत अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द और देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।

हाल के दिनों में कई मशहूर हस्तियों जैसे अक्षय कुमार, कुमार सानू और पत्रकार सुधीर चौधरी को डीपफेक से जुड़ी शिकायतों पर दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है, जो इस समस्या की व्यापकता को उजागर करता है।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी तकनीकों ने पहले ही कई व्यक्तियों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है और यदि इस पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

इस जनहित याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) को एक मजबूत वैधानिक व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।

इसका उद्देश्य AI डीपफेक के संभावित दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल युग में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यह कदम भारत के डिजिटल भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां तकनीकी प्रगति को नैतिक और कानूनी सीमाओं के भीतर रखा जा सके।

सरकार को इन तेजी से उभरती तकनीकों पर नियंत्रण के लिए एक मजबूत नीति बनाने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था इसका गलत इस्तेमाल न कर सके और देश की अखंडता बनी रहे।

यह सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री की प्राथमिकता होनी चाहिए कि डिजिटल सुरक्षा हमारे नागरिकों के लिए सर्वोपरि रहे।

  • सुप्रीम कोर्ट में AI डीपफेक तकनीकों के नियमन हेतु जनहित याचिका दायर की गई।
  • याचिका में निजता, गरिमा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे का उल्लेख किया गया है।
  • केंद्र सरकार से व्यापक नियामक और लाइसेंसिंग ढांचा बनाने की तत्काल मांग की गई।

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Posted on 24 October 2025 | Visit चाचा का धमाका.com for more stories.

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