Jitendra jain jila shivpuri समाचार
प्रधानमंत्री के नाम से आवास, उसमें रहने वाले लोग बिजली-पानी के
ठेकेदार का भी लगभग 4 करोड़ बकाया है,
कॉलोनी के कनेक्शन
बिजली की भी अस्थाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट न होने से खतरे में कॉलोनीवासी
शिवपुरी। जिन आवासों का नाम प्रधानमंत्री के नाम से जुदा है, वो बरसों इंतजार के बाद गरीब परिवारों को मिल पाए। अब उनमें बिजली व पानी जैसी महत्वपूर्ण मूलभूत सुविधा के लिए यह परिवार परेशान है। शनिवार की दोपहर ठेकेदार ने कॉलोनी के लोगों का पानी बंद करने की नीयत से बोर में डाली गई मोटर निकालने को टीम भेजी, जिसे नपाध्यक्ष व सीएमओ ने हड़का कर उसके खिलाफ कार्यवाही की बात कही। चूंकि ठेकेदार का लगभग 4 करोड़ रुपए बकाया है, जो नपा को देना है, इसलिए वो पानी की मोटर निकलवा कर नपा पर दवाब बनाने का प्रयास कर रहा था, जो फिलहाल विफल हो गया।
ऐसे समझें प्रधानमंत्री आवास की सच्चाई:::
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के पीछे बनाए प्रधानमंत्री आवास की कॉलोनी के दूसरी तरफ माधव टाइगर रिजर्व है। एकांत में बनाई गई इस कॉलोनी में 103p आवास हैं, जिनमें से 230 घरों में परिवार निवास कर रहे हैं। फरवरी में यह आंकड़ा 500 के पार हो जाएगा। इन घरों में नल और टोंटियां तो ठेकेदार ने लगवा दीं, लेकिन वो अभी तक मड़ीखेड़ा की लाइन से नहीं जोड़े गए, जबकि कॉलोनी के सैंपबल तक पानी आ गया है। इसके अलावा यहां बिजली का अस्थाई कनेक्शन है, जिसे बिल जमा न करने की बात कहकर बिजली कंपनी कभी भी लाइट काट जाती है। इन मूलभूत सुविधाओं से आए दिन महरूम हो चुके यह गरीब परिवार पूर्व में कलेक्ट्रेट जाकर मुर्दाबाद के नारे लगा चुके हैं।
रात में रहता है रास्ते में खतरा
मेडिकल कॉलेज से लेकर प्रधानमंत्री आवास की दूरी लगभग 500 मीटर है।
इतनी लंबी दूरी तक कोई भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगी, केवल खंभे लगे हैं।
पार्षद अमरदीप शर्मा ने बताया कि मैं तो लंबे समय से मांग कर रहा हूं,
लेकिन नपा से लाइट ही नहीं मिल रही।
यह रास्ता वीरान होने की वजह से यहां रात में असामाजिक तत्व
माधव टाइगर रिजर्व के जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
नगरपालिका यूं तो भ्रष्टाचार के लिए बदनाम है,
लेकिन यहां पर प्रधानमंत्री के नाम से बनी योजना में भी बेहद लापरवाही देखी जा रही है।
पीएम आवास तक मड़ीखेड़ा की लाइन ले जाने के फेर में
पहले 15 दिन तक शिवपुरी शहर में सप्लाई रोकी गई थी
इनमें रहने वाले परिवारों को मड़ीखेड़ा का पानी नहीं मिल पाया।
ठेकेदार का भी लगभग 4 करोड़ बकाया है,
इसलिए वो भी सेवाएं देने से बच रहा है।
गरीब परिवार परेशान है,
जिन्हें देश के प्रधानमंत्री के नाम से बने आवासों में ठिकाना मिला है।
