पुलिस के साथ हुई मारपीट की मै निंदा करता हूँ
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समाचार
जिन लोगों ने मारपीट की उन पर प्रकरण दर्ज हुआ
यह अच्छा रहा कानून को हाथ मै लेने की सजा भी मिलेगी
रन्नौद थाने पर हुई घटना बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
किसी भी परिस्थिति में कानून हाथ में लेना सही नहीं है, लेकिन यह भी सच है कि कुछ पुलिसकर्मी बर्दी की आड़ में खुद को भगवान समझने लगते हैं, जो व्यवस्था और जनता—दोनों के लिए घातक है।
जनता आमतौर पर शांति से रहती है, लेकिन जब हद से ज़्यादा अभद्रता और अपमान किया जाता है, तभी प्रतिक्रिया सामने आती है। यह टकराव किसी के हित में नहीं होता।
इस पूरे मामले में जिस आरक्षक की भूमिका सामने आई है, उसके बारे में पुलिस विभाग के ही कुछ कर्मचारियों से अनौपचारिक बातचीत में यह बात सामने आई कि उसका व्यवहार पूर्व में भी विवादित रहा है और वह कई बार अपने ही स्टाफ के लिए भी समस्या का कारण बना है।
(ये बातें आरोप के रूप में सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।)
ज़रूरत इस बात की है कि—
कानून का पालन जनता और पुलिस—दोनों समान रूप से करें
अभद्र व्यवहार और अहंकार पर शून्य सहनशीलता हो
पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए
क्योंकि सम्मान बल से नहीं, व्यवहार से मिलता है।
लेकिन इसी मामले में रन्नौद थाने के आरक्षक अवधेश शर्मा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आम जनता से बदतमीजी करना उनकी आदत रही है। जहां-जहां इसकी पदस्थापना रही है, वहां उनके व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
यह भी आरोप हैं कि वे अपने पद का दुरुपयोग करते हुए घमंडी रवैया अपनाते हैं।
आरक्षक अवधेश शर्मा का पूर्व पदस्थापन रिकॉर्ड खंगाला
