स्वाति मालीवाल ने हॉस्पिटल्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि मरीज के पास इंश्योरेंस का पता चलते ही इलाज का बिल आसमान छूने लगता है।

 Jitendra jain jila shivpuri  समाचार 

स्वाति मालीवाल ने हॉस्पिटल्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि मरीज के पास इंश्योरेंस का पता चलते ही इलाज का बिल आसमान छूने लगता है। 

यह बयान स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

स्वाति का तीखा प्रहार

स्वाति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर खुलासा किया कि प्राइवेट हॉस्पिटल्स इंश्योरेंस वाले मरीजों को लूटने के लिए अलग रणनीति अपनाते हैं। 

"इंश्योरेंस दिखाते ही मीटर चालू, बेकार टेस्ट और ओवर-ट्रीटमेंट शुरू, उन्होंने लिखा।

 उनका दावा है कि गरीब मरीजों से कम वसूला जाता है, लेकिन मिडिल क्लास को निशाना बनाया जाता है। 

यह बयान मेडिकल माफिया के खिलाफ उनकी पुरानी लड़ाई को दर्शाता है।

 

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज बढ़ा है,

 लेकिन हॉस्पिटल्स बिलों में हेरफेर कर लाभ कमाते हैं।

 स्वाति के अनुसार, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के बावजूद प्राइवेट सेक्टर में लूट मची है।

 उदाहरणों में बिना जरूरत के एमआरआई, सीटी स्कैन और महंगे इंजेक्शन शामिल हैं।

 दिल्ली-एनसीआर के हॉस्पिटल्स पर पहले भी ऐसे आरोप लगे, जहां बिल करोड़ों में पहुंच गए। 

मरीजों को मजबूरन कर्ज लेना पड़ता है।

मरीजों की दुर्दशा

स्वाति ने कई केस साझा किए, जहां इंश्योरेंस की वजह से सामान्य इलाज महंगा हो गया। 

एक मामले में चेकअप के 5 हजार का बिल 2 लाख पहुंच गया।

 वे कहती हैं कि डॉक्टर्स कमीशन के चक्कर में अनावश्यक दवाएं लिखते हैं।

 कोविड के बाद यह समस्या और बढ़ी, 

जब हॉस्पिटल्स ने ब्लैकमार्केट रेट्स लगाए।

 ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और खराब हैं, जहां इंश्योरेंस नाममात्र का है।

सरकार और समाज की जिम्मेदारी

स्वाति ने केंद्र और राज्य सरकारों से हॉस्पिटल बिलों पर कैप लगाने की मांग की।

 वे चाहती हैं कि इंश्योरेंस क्लेम की ऑनलाइन मॉनिटरिंग हो। एनजीओ और एक्टिविस्ट्स ने उनका साथ दिया, 

कहते हुए कि यह लूट जनता का खून चूस रही। 

भोजपुरी-बॉलीवुड फैंस, जो सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हैं, 



सोशल मीडिया पर StopHospitalLoot ट्रेंड चला रहे। स्वाति की आवाज आम आदमी की पीड़ा बयां करती है।

बदलाव की उम्मीद

स्वाति मालीवाल का बयान जागरूकता फैला रहा। 

वे सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग कर रही हैं।

 यदि बिल पारदर्शी हुए तो लाखों परिवार बचेंगे। 

यह मुद्दा चुनावी एजेंडा बन सकता है।

 मरीजों को सलाह है कि बिल चेक करें और शिकायत दर्ज कराएं। स्वाति की हिम्मत अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रही। 

स्वास्थ्य सुधार अब जरूरी है।

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