Jitendra jain jila shivpuri समाचार
जिला शिवपुरी के सिद्धेश्वर रोड शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिद्धेश्वर के अस्तित्व पर हो रहा कब्जा l
अपने सुन्दर घर तक सड़क बनाने के लिए खोदी स्कूल की जमीन, ओर रास्ता बंद,
शिक्षिकाओं ने किया विरोध, पूर्व में भी किया था रास्ते पर कब्जा
शिवपुरी। शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिद्धेश्वर कॉलोनी के अस्तित्व पर अब संकट मंडराने लगा है, क्योंकि इसके आसपास की जमीन पर तेजी से कब्जा किया जा रहा है। गुरुवार को तो हद तब हो गई, जब स्कूल बिल्डिंग के पास की जमीन को खोदकर उसका रास्ता ही बंद कर दिया। स्कूल जमीन की खुदाई एक जमीन कारोबारी ने अपने घर तक जाने के लिए सड़क बनाने के लिए करवा दी। इस दौरान स्कूल की शिक्षिकाओं ने आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस जमीन कारोबारी ने स्कूल का रास्ता बंद किया है, उसने लगभग डेढ़ साल पूर्व स्कूल तक जाने का रास्ता बंद करके उस पर दीवार बनवा कर उसे भी कब्जे में ले चुका है।
शिवपुरी जिला मुख्यालय पर तालाब और नालों के बाद अब शासकीय स्कूल की जमीनों पर भी अब भूमाफिया की नजर पड़ गई है। जिले के अधिकांश शासकीय स्कूलों की जमीन पर स्थानीय दबंग या भूमाफिया कब्जा किए हुए हैं। शहर का शा.प्रा.वि. सिद्धेश्वर एक टीले पर बना हुआ है। स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क के किनारे से रास्ता था, जिसे आज सड़क बनाने के फेर में खोदकर पूरी तरह बंद कर दिया। स्कूल के पीछे सिंकी सांखला का घर है, जहां तक चौड़ा रास्ता बनाने के फेर में वो टीला भी खुद दिया, जिस पर स्कूल बिल्डिंग बनी हुई है। इस स्कूल का एक बड़ा कमरा इसलिए बंद कर दिया, क्योंकि नशेड़ियों ने उसकी खिड़की उखड़कर आने- जाने का रास्ता बना लिया। स्कूल में एक तरफ जमीन कारोबारी लगातार अपना दायरा बढ़ाकर स्कूल को सीमित करने की हर संभव कोशिश कर रहा है।
181 भी नहीं हटवा पाया रास्ते का कब्जा
सीएम हेल्पलाइन में की जाने वाली शिकायतों को वरिष्ठ अधिकारी बहुत गंभीरता से लेकर उसे निराकृत कर कटवाने का प्रयास करते हैं। सिद्धेश्वर स्कूल के लिए जैन मंदिर के आगे से एक पुराना रास्ता हुआ करता था, जिसे सिंकी सांखला ने सिंगल ईंट की दीवार बनाकर उस पूरी जगह को कवर्ड करके अपने निजी उपयोग में ले लिया। इस कब्जे की शिकायत 181 पर लोकेंद्र सिंह ने की थी, तथा एक साल तक कोई कार्यवाही न करते हुए अधिकारी फोन लगाकर लोकेंद्र से शिकायत के बारे में पूछते रहे, और फिर परेशान होकर लोकेंद्र ने शिकायत बंद करवा दी।
