Jitendra jain jila shivpuri
जिला शिवपुरी /की जनपद पंचायत करैरा अंतर्गत ग्राम पंचायत नारही में मनरेगा सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, फर्जी मस्टर रोल और घटिया निर्माण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के काग़ज़ों में लाखों रुपये के निर्माण कार्य पूरे दिखा दिए गए हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत में न तो सड़कें हैं, न नालियां और न ही अन्य निर्माण कार्यों का कोई अस्तित्व।
ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ों एवं मेरी पंचायत तथा पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज जानकारी के अनुसार, कई कार्यों में भुगतान भी दर्शाया जा चुका है। बावजूद इसके, मौके पर जाकर देखने पर संबंधित स्थानों पर कोई निर्माण दिखाई नहीं देता। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि शासकीय राशि का दुरुपयोग कर पंचायत स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया है।
मनरेगा योजना अंतर्गत ऊमर वाला आदिवासी मोहल्ला में ₹4 लाख 42 हजार की राशि से निर्माण कार्य स्वीकृत बताया गया, लेकिन मोहल्ले में आज तक न सड़क बनी, न नाली और न ही कोई स्थायी संरचना। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना कार्य कराए ही मस्टर रोल भरकर मजदूरी का भुगतान निकाल लिया गया।
इसी तरह नाथूराम सेन के मकान से लोहरपुरा की ओर सीसी सड़क निर्माण पर ₹2 लाख 99 हजार खर्च होना दर्शाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क घटिया सामग्री से बनाई गई, जिसकी हालत मात्र दो माह में ही खराब हो चुकी है। सड़क पर गड्ढे, दरारें और उखड़ती सीमेंट परतें गुणवत्ता मानकों की पोल खोल रही हैं।वहीं हाई स्कूल नारही में वृक्षारोपण एवं निर्माण कार्य के नाम पर ₹4 लाख 27 हजार खर्च दिखाया गया है, लेकिन विद्यालय परिसर में न तो कोई वृक्षारोपण है और न ही कोई निर्माण कार्य। पूरा खर्च केवल फाइलों और तस्वीरों तक सीमित बताया जा रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि कई कार्यों में फर्जी मस्टर रोल के माध्यम से ऐसे मजदूरों के नाम से भुगतान निकाला गया, जिन्होंने कभी काम ही नहीं किया। साथ ही तकनीकी स्वीकृति, माप-पुस्तिका (एमबी) और निरीक्षण रिपोर्ट में भी गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर शिवपुरी से लिखित शिकायत कर मांग की है कि ग्राम पंचायत नारही में चल रहे सभी विकास कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे प्रकरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर सरपंच, सचिव, संबंधित इंजीनियर एवं अन्य अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही गबन की गई शासकीय राशि की वसूली की भी मांग की गई है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत, आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया अपनाने को मजबूर होंगे। पंचायत में विकास के नाम पर हो रही कथित लूट ने शासन की योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

