Jitendra jain jila shivpuri समाचार. **ग्राम नारही में विकास कार्यों पर बड़ा सवाल सरकारी योजनाएँ काग़ज़ों में पूरी, ज़मीन पर अधूरी जनता पूछ रही है हिसाब**
करैरा ग्राम पंचायत नारही में चल रहे विकास कार्य आज गंभीर सवालों के घेरे में हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और ज़मीनी हकीकत के बीच भारी अंतर दिखाई दे रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से स्वीकृत योजनाएँ वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी हैं, जबकि पोर्टल पर उन्हें Onset of Work या Completion of Work दिखाया जा रहा है।सबसे चौंकाने वाला मामला सी.सी. रोड निर्माण कार्य का है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के अंतर्गत ₹8,34,000 की लागत से स्वीकृत सड़क आज भी कच्ची हालत में है। 28 जून 2024 को अपलोड की गई तस्वीरें स्पष्ट दिखाती हैं कि न तो सड़क का ढांचा पूरा है और न ही गुणवत्ता का कोई मानक अपनाया गया है। सवाल यह है कि जब कार्य अधूरा है, तो भुगतान और प्रगति रिपोर्ट किस आधार पर दर्ज की गई?
इसी तरह दिव्यांग अनुकूल रैंप व शौचालय निर्माण हेतु ₹4,81,368 की स्वीकृति दी गई, लेकिन व्यय शून्य दिखाते हुए कार्य को चालू दर्शाया गया है। क्या यह केवल औपचारिकता है या फिर धनराशि का दुरुपयोग?ड्रेनेज कंस्ट्रक्शन के दो अलग-अलग कार्यों में कुल मिलाकर लगभग ₹9 लाख की राशि खर्च दिखाई गई है। एक कार्य को पूर्ण और दूसरे को प्रगति में बताया गया है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि जलनिकासी की समस्या जस की तस बनी हुई है। बरसात में आज भी गलियाँ जलमग्न हो जाती हैं।सबसे गंभीर प्रश्न कम्युनिटी सैनिटरी कॉम्प्लेक्स (CSC) को लेकर है। ₹6,10,500 की लागत से स्वीकृत यह कार्य वर्ष 2022–23 का है, लेकिन जनवरी 2026 तक भी Onset of Work की स्थिति में दिखाया जा रहा है। तीन साल बाद भी शौचालय केवल फाइलों में मौजूद है, ज़मीन पर नहीं।ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और पंचायत स्तर पर जवाबदेही पूरी तरह गायब है। सवाल पूछने पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया जाता। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो फिर कार्यों में वर्षों की देरी क्यों? और यदि गड़बड़ी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं यह मामला केवल नारही पंचायत का नहीं, बल्कि सरकारी धन के संरक्षण और पारदर्शिता का है। जनता का पैसा विकास के नाम पर स्वीकृत होता है, लेकिन यदि वही पैसा बिना काम के खर्च दिखा दिया जाए, तो यह सीधे-सीधे विश्वासघात है।अब ज़रूरत है कि जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और राज्य स्तर के निगरानी विभाग इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराएँ। दोषी पाए जाने वाले सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी जनप्रतिनिधि सरकारी धन को हल्के में न ले।ग्राम नारही की जनता आज केवल एक ही सवाल पूछ रही है विकास के नाम पर मिला पैसा गया कहाँ?


