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राजस्व अमले को छोड़ करेरा पुलिस ने फरियादी को बनाया आरोपी, किया मामला दर्ज
4 बीघा जमीन की दो बार रजिस्ट्री होने के बाद हुआ नामांतरण, ऑनलाइन नामांतरण हटाकर दर्ज किया विक्रय से वर्जित
शिवपुरी। जिले में जमीनों के विवादित मामले राजस्व विभाग की मिलीभगत के चलते थमने का नाम नहीं ले रहे। ऐसा ही एक मामला करेरा में सामने आया, जिसमें 4 बीघा कृषि भूमि की दो बार रजिस्ट्री होने के बाद उसका नामांतरण भी हो गया। उसके बाद पटवारी ने बिना किसी परमीशन के ऑनलाइन नामांतरण हटाने के साथ ही उक्त जमीन को विक्रय से वर्जित रिकॉर्ड।में दर्ज कर दिया। इस मामले की शिकायत जमीन खरीदने वाले ने जब पुलिस थाना करेरा में की, तो पुलिस ने बिना जांच किए राजस्व विभाग को क्लीन चिट देकर जमीन बेचने वाली दूसरी पार्टी के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया।
ऐसे समझें पूरा मामला:
करेरा के जरगंवा गांव में मौजूद 4 बीघा कृषि भूमि पूर्व सरपंच मंगल सिंह यादव से 28 फरवरी 2024 को डॉ.श्वेता शर्मा के नाम से रजिस्ट्री करवाई, तथा उक्त भूमि का श्वेता के नाम से 6 मार्च 2024 को नामांतरण भी हो गया। इसके बाद उक्त भूमि 13 फरवरी 2025 को श्वेता शर्मा ने उमेश गुप्ता के नाम रजिस्ट्री करा दी। इसके बाद 13 मई 2025 को उमेश गुप्ता के नाम से नामांतरण भी हो गया। इतने समय तक जमीन में कोई विवाद नहीं था, लेकिन जब उमेश गुप्ता ने उक्त जमीन अधिक दाम में अन्य किसी पार्टी को विक्रय करने की तैयारी की तो पटवारी बृजेश यादव ने उमेश गुप्ता का नाम ऑनलाइन नामांतरण से हटा दिया। इतना ही नहीं जिस जमीन की दो बार एजिस्ट्री और नामांतरण हो गया, उसे विक्रय से वर्जित रिकॉर्ड में बता दिया। इसमें भी रोचक पहलू यह है कि जिस सर्वे नंबर में श्वेता शर्मा की जमीन थी, उसमें और भी खातेदार हैं, लेकिन उनकी जमीन विक्रय से वर्जित नहीं दर्शा रही। जिससे यह स्पष्ट है कि राजस्व अमले ने रिकॉर्ड में हेराफेरी की है।
कलेक्टर की नहीं हो पाई जांच, उधर मामला दर्ज
इस पूरे घटनाक्रम का चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया, उन्होंने दो माह पूर्व कलेक्टर से जब शिकायत की थी, तब कलेक्टर ने मामला भीड़ बताते हुए कार्यवाही की बात कही थी। दो माह में कलेक्टर इस मामले की जांच नहीं करवा पाए, और इधर करेरा टीआई ने बिना किसी जांच के शिकायतकर्ता के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया।
