Jitendra jain jila shivpuri समाचार. शिवपुरी दहशत फैला रही बाघिन को किया ट्रेंकुलाइज, बेहोशी हालत में लाए पार्क में
18 दिन से गांव-गांव घूमकर खौफ फैला रही बाघिन जब नहीं लौटी टाइगर रिजर्व की सीमा में, तो फिर बेहोश करके लाए वापस
शिवपुरी। पिछले 18 दिन से कोटा-झांसी फोरलेन पर स्थित गांवों में दहशत का पर्याय बन चुकी एमटी- 6 को आखिरकार मंगलवार की सुबह टाइगर रिजर्व की टीम ने बेहोश करके पकड़ा, और फिर भरकुली गेट से अंदर ले जाकर जंगल में जाया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि बांधवगढ़ में भी यह बाघिन ग्रामीण क्षेत्रों के पास ही रहती थी, इसलिए वो जंगल छोड़कर रिहायशी इलाके ही तलाश रही है।
ज्ञात रहे कि बीते 27 दिसंबर की सुबह माधव टाइगर रिजर्व के भरकुली गेट के अंदर।बल्लारपुर क्षेत्र के बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन को छोड़ा गया था। एंटी- 6 बाघिन ने टाइगर रिजर्व के जंगल में हिरण व दूसरे वन्यजीव को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों का रास्ता पकड़ लिया था। इस दौरान वो चाड, सतनबाड़ा डोंगर के बाद वो सुरवाया के ग्राम सरदारपुरा, मोहम्मदपुर, ख़ुटेला, अमोला पुल की घाटी में घूमती हुई वापस मोहम्मदपुर आ गई थी। इस दौरान बाघिन ने।लगभग एक दर्जन पालतू मवेशियों को अपना शिकार बनाया। इतना ही नहीं बाघिन के डर की वजह से लोग न तो अपनी खेती देख पा रहे थे, और ना ही अपने घरों में चेन से सो पा रहे थे। मादा टाइगर की ट्रैकिंग टीम उसके साथ चल रही थी, जो गांवों में ऐलान करती घूम रही थी कि शाम के बाद घरों से बाहर न निकलें, घरों में खिड़की-दरवाजे बंद करके सोएं। एक तरफ खेतों में बाघिन और दूसरी तरफ पार्क टीम की चेतावनी ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी थी। उधर पार्क टीम इसी इंतजार में थी कि शायद ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करके बाघिन वापस कोर एरिया में लौटेगी, लेकिन पिछले 18 दिन में ऐसे कुछ आसार नजर नहीं आए।
जब बाघिन ने घर वापसी नहीं की, तो उसे जबरन वापस जंगल में लाने के लिए आज सुबह ट्रेंकुलाइज करने वाली टीम वन्यजीव चिकित्सक डॉ. जितेंद्र जाटव के नेतृत्व में हाथी पर सवार होकर सुरवाया के ग्रामीण क्षेत्रों में रवाना हुई। चूंकि ट्रेकिंग टीम साथ में थी, इसलिए मादा टाइगर की लोकेशन जल्दी ट्रेस करके उसे गन से बेहोशी का इंजेक्शन देकर कुछ समय तक जंगल।में रुक कर इंतजार किया गया। जब बेहोशी की दवा ने बाघिन पर अपना असर दिखाया, तो वो जंगल में गिरकर बेहोश हो गई। बाघिन के बेहोश होने के बाद उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर वाहन में रखवा कर भरकुली गेट के।अंदर ले जाया गया। जहां पर होश में आने के बाद बाघिन वापस जंगल में चली गई।
इतना तो तांडव ने भी नहीं किया था तांडव
इस मादा से पहले माधव टाइगर रिजर्व में एक मादा टाइगर और फिर दूसरी नर टाइगर तांडव को लाकर छोड़ा गया था। तांडव ने भी पार्क की सीमा को पार किया था, लेकिन फिर वो वापस कोर एरिया में वापस चला गया था। लेकिन यह बाघिन जबसे माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई, वो जंगल छोड़कर लगातार आसपास के गांव में घूमकर दहशत फैला रही थी। अब बड़ा सवाल यह है कि ट्रेक्युलाइज करके जंगल में वापस लाई गई बाघिन फिर वापस गांवों में न पहुंच जाए।
