Jitendra jain jila shivpuri
समाचार
दस्तावेजी चूक के कारण लगभग 300 करोड रुपए की शासकीय भूमि निकली हाथ से
करैरा :- कस्बा करैरा के मध्य में स्थित सर्वे क्रमांक 2038, 2036, 2038 व 2040/1 स्तिथ रकबा लगभग 25 बीघा भूमि शासकीय भूमि के रूप मे दर्ज है। एक लंबी कानूनी नूरा कुश्ती के बाद नगर परिषद करैरा के हाथ से निकल गई है।
सर्वोच्च न्यायालय में नगरीय निकाय करैरा द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव पिटिशन क्रमांक 42849/2025 को सर्वोच्च न्यायालय की चार सदस्य खंडपीठ ने याचिका में की गई दस्तावेजी त्रुटियों को लेकर उक्त याचिका दिनांक 10/12/2025 को खारिज कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार करैरा नगर के बीचो-बीच विश्राम भवन के सामने एवं राजस्व अधिकारियो के आवास के बगल मे स्थित शासकीय भूमि के मालिकाना हक को लेकर,प्रकाश नारायण आदि विरुद्ध नगर परिषद करैरा,मध्य प्रदेश शासन के बीच विवाद दशकों से चला रहा था। निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालय की एकल पीठ तक नगर परिषद करैरा को उपरोक्त वर्णित सर्वे नंबरों का भूमिस्वामी मानकर उपरोक्त भूमि, नगर परिषद करैरा की सुपुर्दगी में राज्य शासन द्वारा दे दी गई थी।
इस निर्णय के विरुद्ध प्रकाश नारायण आदि ने उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश ग्वालियर युगल खंडपीठ में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय मे उक्त भूमि स्वत्व संबंधी प्रकरण वर्ष 2004 से प्रचलित था। नगर परिषद करैरा व मध्य प्रदेश शासन द्वारा अपना पक्ष ईमानदारी से नहीं रखने व प्रकरण के गंभीरता से नहीं लेने के कारण करोड़ों रुपए की शासकीय भूमि तत्समय ही मध्यप्रदेश शासन के हाथ से निकल गई थी। नगर परिषद करैरा एवं मध्यप्रदेश शासन के प्रतिनिधि कलेक्टर जिला शिवपुरी द्वारा उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में अपील प्रस्तुत की गई जोकि WP 13258/2020 पर दर्ज होकर वर्ष2023 तक विचाराधीन रही।
वर्ष 2023 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विवादित भूमि का निर्णय प्रकाश चंद्र अग्रवाल आदि के पक्ष में अपना सुनाया।
निर्णय की जानकारी मिलते ही गहरी नींद सोये नगर परिषद करेरा की एवं मध्यप्रदेश शासन के प्रतिनिधियों की तंद्रा टूटी और आनन फ़ानन में उक्त निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई।उक्त याचिका प्रस्तुत करने मे भी नगर परिषद करैरा द्वारा गंभीर कानूनी कमिया छोडी गई जिसके चलते पुनर्विचार याचिका भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई। अंतिम विकल्प के तौर पर क्यूरेटिव पिटिशन माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई। क्यूरेटिव पिटीशन में जानबूझकर की गई दस्तावेज कमियों के कारण उक्त क्यूरेटिव पिटीशन भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 10 दिसंबर 2025 खारिज कर दी गई।
सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट लिखा है कि प्रस्तुत क्यूरेटिव याचिका सही तरीके से तैयार नही की गई है।
याचिका के आठ बिंदुगत की गई या हुई कमियों को सुधारने के लिए राज्य शासन एवं नगर परिषद करेरा को रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पत्र तथा ईमेल के माध्यम से सूचना देकर निश्चित समयावधि में सुधार के लिए सूचित किया गया था किंतु राज्य शासन व नगर परिषद करेरा की हीलाहवाली और लापरवाही से उक्त त्रुटियों का समय पर समाधान नहीं किया गया जो अंततः राज्य शासन एवं नगर परिषद करेरा की हार का कारण बनी। चूंकि क्यूरेटिव याचिका सर्वोच्च न्यायालय के किसी निर्णय के पुनरीक्षण के लिए अंतिम विकल्प होती है,इस कारण मध्यप्रदेश राज्य शासन द्वारा सार्वजनिक हित के नगर पंचायत भवन एवं धर्मशाला के लिए आरक्षित की गई उक्त भूमि अब नगर परिषद करैरा एवं राज्य शासन के हाथों से निकल चुकी है। नगर परिषद करेरा तथा कलेक्टर कार्यालय जिला शिवपुरी के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उक्त मामले में निरंतर गंभीर लापरवाही एवं अनियमितताएं बरती गई जिसके कारण करोड़ों रुपए की शासकीय भूमि मध्य प्रदेश शासन नगर परिषद करेरा के हाथों से निकल चुकी है। नगर परिषद करैरा द्वारा इस प्रकरण मे बरती गई गंभीर अनियमितताओं से करेरा कस्बे के नागरिक हतप्रभ है तथा इस प्रकरण मे राज्य शासन तथा नगर परिषद के अधिकारियो द्वारा बरती गई गंभीर लापरवाही को लेकर गुस्से की लहर व्याप्त है। इस प्रकरण के संबंध में करैरा नगर के सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र जैन प्रधान का कहना है यह मामला शुद्ध रूप से राज्य शासन की लापरवाही एवं हीलाहवाली का प्रतीक है। राज्य शासन व नगर परिषद के आला अधिकारियो द्वारा इस प्रकरण को कभी गंभीरता से लिया ही नहीं गया है।उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक प्रत्येक स्तर पर शासन की नुमाइंदो द्वारा भ्रष्टाचार किया गया है एवं अपने पदीय दायित्वों का ईमानदारी से पालन नहीं कर,प्रकाश चंद्र अग्रवाल को अवैध लाभ पहुंचाया गया।
ये मामला मेरे कार्यकाल का नही है संबंधित क्यूरेटिव याचिका मेरे पदभार ग्रहण करने से पूर्व दाखिल की जा चुकी थी। क्यूरेटिव याचिका मे हुई त्रुटियों पर सी एम ओ करैरा द्वारा स्पष्ट उत्तर नही दिया गया।
गोपाल कृष्ण गुप्ता
सी एम ओ, नगर परिषद करैरा.!!
